टिकट की लालच ने बनाया नेताओ को दल बदलू…

भोपाल/मुरैना।

मध्यप्रदेश का इस साल का विधानसभा चुनाव दिनों दिन दिसचस्प होता जा रहा है। टिकट की आस लगाए नेता एक दल से दूसरे दल में शामिल होने लगे है। बीते दो हफ्तों में दर्जनों नेताओं द्वारा दल बदले गए। किसी ने कांग्रेस का हाथ थामा तो कोई भाजपा के साथ हो लिया। वही कईयों ने दूसरी पार्टियों की तरफ रुख किया। आज ही तीन दिग्गज नेता कांग्रेस में शामिल हुई। ऐसे में पूर्व विधायक संध्या राय के कांग्रेस भी शामिल होने की अटकलें तेज हो चली है। खबर है कि वे नामांकन से पहले कांग्रेस में शामिल हो सकती है।

दरअसल, मध्य प्रदेश की दिमनी विधानसभा सीट को पाने के लिए इस बार बीजेपी, बसपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। फिलहाल इस सीट पर बसपा का कब्जा है और बलवीर सिंह डंडोतिया यहां से विधायक है।इस बार भी बसपा ने डंडोतिया को मैदान में उतारा है, हालांकि कांग्रेस-भाजपा अभी तक अपने प्रत्याशियों पर विचार नही कर पाई है।कांग्रेस-भाजपा में अबतक टिकट को लेकर घमासान मचा हुआ है। पिछले चुनाव की बात करे तो संध्या राय 2003 में दिमनी सो भाजपा विधायक रहीं है और वर्तमान में राज्य महिला आयोग की सदस्य है। इन दिनों संध्याराय के कांग्रेस से टिकट मांगने की चर्चाएं जोरों पर हैं।

संध्याराय मुरैना से लेकर प्रदेश तक भाजपा का जाना माना चेहरा हैं। उन्हें भाजपा का कर्मठ कार्यकर्ता माना जाता है, लेकिन बार-बार टिकट वितरण में उनकी उपेक्षा संगठन व सरकार ने की है। खबर है कि क्षेत्र के कद्दावर नेता जो केन्द्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनसे राय की नहीं बनती है। इस वजह से हर बार उनका टिकट काटा गया। खबर है किसी के माध्यम से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से उनकी चर्चा चल रही है। यदि अंबाह से कांग्रेस उन्हें टिकट देती है तो वे भाजपा को छोड़ देंगी।इस बार इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।

ऐसा रहा है इतिहास

दिमनी विधानसभा सीट से 2003 में संध्याराय विधायक बनी थीं। उस समय दिमनी विधानसभा अजा के लिए सुरक्षित थी, लेकिन 2008 में दिमनी के अनारिक्षत सीट होने के बाद संध्याराय ने अंबाह सुरिक्षत सीट से पार्टी से टिकट मांगा। पार्टी ने टिकट कमलेश सुमन को दे दिया। इसके बाद 2013 विधानसभा चुनाव में राय ने अंबाह से फिर से टिकट की मांग रखी, लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया। उनके बदले बंशीलाल को टिकट दे दिया। बंशीलाल चुनाव हार गए। पिछली चुनाव में मतदाताओं ने बीजेपी का साथ छोड़ का बसपा के बलवीर सिंह डंडोतिया को जिताया था। 1998 से लगातार यहां बीजेपी जीत रही थी, लेकिन 2013 के चुनाव में बसपा ने बड़ा उलट फेर कर दिया।

अब 2018 में भी उन्होंने अंबाह सीट से अपनी दावेदारी रखी, लेकिन बताया जाता है कि इस बार भी पार्टी उनकी उपेक्षा करते हुए किसी दूसरे भाजपा नेता को टिकट देने का मन बना रही है।बसपा के बाद कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी और बीजेपी तीसरे नंबर पर थी। इस बार टक्कर भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच में मानी जा रही है।हालांकि, बीजेपी की बूथ स्तर से तैयारी चल रही है लेकिन उम्मीदवार को लेकर उसके सामने मुश्किल है, क्योंकि पार्टी में टिकट के दावेदार अधिक हैं।वही इस सीट पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अच्छी पकड़ है और इसका फायदा भाजपा को लाभ मिल सकता है। यहां सबसे ज्यादा तोमर समुदाय के लोग है, जो चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति व ब्राह्मण मतदाता के वोट भी बड़ा फेरबदल कर सकते हैं।

जातीय समीकरण

दिमनी में तोमर (राजपूत), अनुसूचित जाति व ब्राह्मण मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं।

कुल मतदाता : 204591

पुरुष मतदाता : 113709

महिला मतदाता : 90882

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